सोमवार, जुलाई 27

ये कैसी जीत ?

कुछ दिन पहले मेरे पड़ोसी शर्मा जी के यहां पिछले दरवाजे से दो तीन लोग घुस आए..उन दिनों शर्मा जी अपने किसी रिश्तेदार के यहां गए हुए थे..लेकिन उन्होने लापरवाही दिखाते हुए पिछला दरवाजा खुला ही छोड़ दिया था...उनकी लापरवाही की वजह थी सोसायटी में पुख़्ता सुरक्षा इंतजाम का होना..उन्हे लगता था कि उनकी सोसायटी में तो राम राज है यहां तो किसी तरह की चोरी डकैती हो ही नहीं सकती...खैर, चार-पांच दिनों के बाद जब वो वापस अपने घर लौटे तो, घर में पहले से छिपे दो तीन बदमाशों ने उनसे मारपीट शुरू कर दी..शर्मा जी ने सिक्योरिटी गार्ड को बुलवा लिया और उनलोगों से भिड़ गए...दो तीन घंटे तक मारपीट चलती रही..इस दौरान शर्मा जी के बेटे को काफी चोटें आई, खुद शर्मा जी का भी चश्मा और उनके आगे के दो दांत टूट गए...आख़िरकार, इस बात की जानकारी मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई..शर्मा जी ने घर में घुस आए बदमाशों की शिकायत उनसे की लेकिन पुलिस ने बीच बचाव करते हुए शर्मा जी को शांत रहने के लिए कहा और घर में घुस आए लोगों से आईन्दा बदमाशी ना करने की बात कहते हुए वहां से चले जाने को कहा...शाम को शर्मा जी मेरे घर मिठाई का डिब्बा लेकर आए और मुझे अपनी वीरता के किस्से सुनाने लगे...लेकिन मुझे उनकी वीरता हज़म नहीं हो रही थी..मुझे ये समझ में नहीं आ रहा था कि शर्मा जी की जीत वाकई जीत थी या फिर वो अपने निकम्मेपन को छुपाने के लिए उसे अपनी वीरता के झूठे किस्से कंबल से ढ़ंक रहे थे...इस पूरे मामले में अगर किसी ने वीरता दिखाई थी तो वो था शर्मा जी का बीस साल का बेटा जो अपनी जान की परवाह ना करते हुए उन बदमाशों से भिड़ गया..हालांकि इस पूरे मामले में उसे काफी चोटें आई लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और बदमाशों के होश ठिकाने लगा दिए...अब मुझे ये समझ में नहीं आ रहा है कि अगर शर्मा जी ने अपने लापरवाही के कारण घर में घुस आए बदमाशों को, भगा दिया तो क्या ये उनकी जीत है या फिर कुछ और ? खैर इन सब बातों से मुझे क्या लेना..मुझे तो बस आज शाम उनके घर जाना है उनकी जीत की पार्टी में शामिल होने के लिए...लेकिन शर्मा जी की ये पूरी कहानी मुझे दस साल पहले हुए करगिल युद्ध की याद दिला गई ...जिसमें हमारे 524 जांबाज शहीद हो गए थे..मुझे वो शहीद शर्मा जी के बेटे जैसे लगे...मैं उन जांबाज शहीदों को सलाम करता हूं लेकिन क्या अपनी जमीन को दुश्मनों के हाथ से छिनने के दिन को विजय दिवस कहना चाहिए ?

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