बुधवार, सितंबर 30

क्वात्रोकी को क्लीन चिट

सुप्रीम कोर्ट में आखिरकार यूपीए सरकार ने अपनी मंशा साफ कर दी...उसने डंके की चोट पर कह दिया कि क्वात्रोकी का बोफोर्स घोटाला कांड से कोई लेना देना नहीं है... अब तो मेरी समझ में ये नहीं आता है कि जब बोफोर्स घोटाले से किसी का कोई लेना-देना ही नहीं है तो अस्सी के दशक में जो बोफोर्स घोटाला हुआ था उसमें किसी ने लेन-देन किया भी था या नहीं... क्यों कि अब तक जितने आरोपित थे वो सब एक-एक कर बेगुनाह साबित होते जा रहे हैं.. शायद यही वजह है कि यूपीए सरकार के दुबारा सत्ता में आने की खुशी भारत से ज़्यादा इटली के लोगों में थी.. इटली के लोगों को ऐसा लगता है जैसे इंग्लैंड के बाद उन्ही के देश ने भारत को गुलाम बनाया है... यूपीए सरकार और गांधी परिवार के वफादार लोगों की सोच भी शायद यही होगी कि 'सारी खुदाई एक तरफ मैडम जी का भाई एक तरफ' ... क्वात्रोकी पूरे मामले से बरी हो जाएगा ये तो उसी वक्त साफ हो गया था जब भारत के विदेश मंत्री गुपचुप तरीके से क्वात्रोकी और उसके बेटे से मिले थे... दूसरा संकेत तब मिला जब क्वात्रोकी के फ्रीज किए गए विदेशी खाते को थोड़ी देर के लिए डीफ्रीज कर दिया गया और उसी थोड़ी देर में क्वात्रोकी ने अपने सारे पैसे उस खाते से निकाल लिए.. तीसरा संकेत तब मिला जब अर्जेंटीना में क्वात्रोकी की गिरफ़्तारी के बावजूद भारत सरकार उसके ख़िलाफ़ कोई सबूत पेश नहीं कर पाई और उसे क्वात्रोकी के सभी कानूनी खर्चे भी देने पड़े... चौथा संकेत तब मिला जब यूपीए सरकार ने क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ इंटरपोल को जारी किया गया रेड कार्नर नोटिस वापस ले लिया... यूपीए सरकार संकेत पर संकेत दिए जा रही थी फिर भी भारत की नादान जनता क्वात्रोकी को सज़ा मिलने की आस लगाए बैठी थी... आखिरकार कल वो दिन आ गया जब सब लोगों का इंतजार ख़त्म हो गया और यूपीए सरकार ने क्वात्रोकी को दूध का धुला हुआ मान लिया... बड़े बुजुर्ग तो पहले ही कह गए हैं कि 'सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का'

सोमवार, सितंबर 21

अपनी डफली अपना राग

मुंबई हमले के साजिश में सक्रिय भूमिका निभाने वाले हाफ़िज़ सईद को पाकिस्तान में उनके ही घर में नज़रबंद कर दिया गया है...ये ख़बर सुनते ही भारत के राजनेता अपनी क़ाबिलियत का ढ़िंढ़ोरा पीटने लगे... उन्होने ये दावा करना शुरू कर दिया कि उनकी कूटनीति के कारण ही सईद को नज़रबंद किया गया है... पर हक़ीक़त कुछ और है...पिछले कई महीनों से भारत 26 नवंबर को मुंबई पर हुए हमले में कथित भूमिका के लिए जमात उद दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग करता रहा है... जमात उद दावा को प्रतिबंधित लश्करे तैबा का नया रुप माना जाता है...26 नवंबर को हुए मुंबई हमले की जल्दी ही बरसी होने वाली है..लेकिन अबतक उसके दोषियों के ख़िलाफ़ कोई ठोस कार्रवाई नहीं जा सकी है...भारत सरकार कसाब को अपने गले की घंटी बनाकर अंतर्राष्ट्रीय मंच पर इंसाफ़ के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहा है... लेकिन उसे इंसाफ़ के नाम पर मिल रही है केवल दिलासाएं... पाकिस्तान ने अमेरिका के दबाव में आकर जिन सात लोगों को गिरफ़्तार किया है उनके ख़िलाफ़ जांच और कार्रवाई केवल कागजों में ही सिमट कर रह गई है.. जब भी पाकिस्तान पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव पड़ता है वो उस कागज में दो-चार लाईन और जोड़ कर दबाव डालने वालों को संतुष्ट कर देता है...

हाफ़िज़ सईद को नज़रबंद करने का मामला ऐसी ही एक कोशिश है... पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर दिखाने के लिए सईद को उनके घर में ही नज़रबंद कर दिया है... लेकिन उसके ख़िलाफ़ जो आरोप लगाए हैं वो बेहद ही बचकाना है... दरअसल इसके पीछे पाकिस्तान का एक स्वार्थ छुपा हुआ है.. पाकिस्तान ने सईद को भड़काऊ भाषण देने के आरोप में नज़रबंद किया है...और पाक चाहता है कि ईद के मौके पर सईद कोई ऐसा भड़काऊ भाषण ना दे दें जिससे मुल्क में दंगा भड़के... लेकिन पाकिस्तान ने इस कार्रवाई को ऐसे पेश किया जैसे वो मुंबई हमला मामले के बारे में काफी गंभीरता से कार्रवाई कर रहा है... पाकिस्तान के इस फरेब को भारत के राजनेताओं ने भी सही मान लिया और जुट गए अपनी कूटनीतिक ज्ञान का बखान करने में... अगर हमारे राजनेताओं में इतना ही कूटनीतिक ज्ञान होता तो 16 जुलाई को शर्म अल शेख में पाकिस्तान के साथ जो साझा बयान जारी हुआ वो नहीं हुआ होता.. ख़ैर राजनेताओं का क्या.. वो तो अपनी डफली अपना राग के लिए मशहूर तो हैं ही... कम से हम जैसे आम लोग उनके बहकावे में ना आएं... यही हमारी सेहत के लिए ठीक रहेगा

गुरुवार, सितंबर 17

हंगामा है क्यों बरपा ?

राहुल बाबा के ट्रेन पर पथराव क्या हुआ... इसके आरोपियों को पकड़ने के लिए विशेष दस्ते की नियुक्ति कर दी गई...ट्रेन के गार्ड ने भी अपनी सतर्कता दिखाते हुए बताया कि उसने चार युवकों को ट्रेन पर पत्थर फेंकते हुए देखा था.. साथ ही उसने ये भी बताया कि उसने पत्थर फेंक रहे युवकों को मना भी किया था...शताब्दी ट्रेन के इस गार्ड महाशय की चौकसी देखकर ऐसा लगता है जैसे भारतीय रेलवे सुधर गया है.. लेकिन याद कीजिए कुछ दिन पुरानी बात जब बिहार में एक ट्रेन में घुसकर कुछ लोगों ने एक पूरी बोगी के यात्रियों को लूट लिया था... और अगर इससे कुछ दिन और पहले की बात करें तो एक पूरी ट्रेन को कुछ लोगों ने रोककर आग के हवाले कर दिया था...ऐसी घटनाओं को याद करने बैठा जाए तो एक के बाद एक ना जाने कितनी घटनाएं स्मृति पटल पर दस्तक देती चली जाएगी...

लेकिन इन मामलों में ना तो गार्ड चौकस था और ना ही रेलवे सुरक्षा बल.. पर जब बात राहुल बाबा की हो तो पूरी चौकसी तो बरतनी ही पड़ती है.. क्यों कि राहुल बाबा भले ही दलितों के घर में खाते हों... और शताब्दी में बैठकर आम लोगों के साथ रेल यात्रा करते हों.. पर ऐसा करने से कोई आम आदमी तो हो नहीं जाता... प्रशासन के बाबुओं को भी ये पता है.. शायद यही वजह है कि वो राहुल बाबा को आम आदमी समझने की भूल नहीं करना चाहते हैं.. और वो पथराव जैसी छोटी बात को भी तूल देने में लगे हुए हैं... रही बात कांग्रेस के किफायत अभियान की तो... शायद कांग्रेसी ये भूल जाते हैं कि जब वो इकॉनॉमी क्लास में या फिर रेल से यात्रा करते हैं तो उनके आसपास की सीट उनके सुरक्षाकर्मियों के लिए रिजर्व की जाती है... और अगर इस पूरे खर्चे को जोड़ा जाए तो वो बिजनेस क्लास से कहीं ज़्यादा महंगा साबित होता है... और आम आदमियों को इससे परेशानी होती है वो अलग... ऐसे में अगर राहुल बाबा और सोनिया जी आम आदमियों के बारे में सोचना चाहती हैं तो उन्हे आम आदमियों के दिल के बजाए पेट का ख्याल करना चाहिए... क्यों कि अगर वो बिजनेस क्लास में ही बैठकर लोककल्याण के बारे में बेहतर योजनाएं तैयार कर पाएं तो इससे आम आदमियों का भला होगा.. बजाए इसके कि आम आदमियों के साथ सफर करके पूरा ध्यान उनकी सहानुभूति बटोरने में लगा रहे

मंगलवार, सितंबर 8

मंत्रियों की ऐय्याशी

खुद को आम आदमियों की सरकार बताने वाली यूपीए सरकार ने पिछलने दिनों सूखे से निपटने के लिए अनोखा ऐलान किया था.. उन्होने सूखाग्रस्त इलाकों में वित्तीय सहायता पहुंचाने के लिए अपने मंत्रियों की तनख्वाह से बीस फीसदी की कटौती करने का ऐलान किया था.. यूपीए सरकार की इस घोषणा ने उसे लोगों के बीच और मशहूर बना दिया..आम लोगों को लगने लगा कि वाकई यूपीए सरकार आम लोगों की ही सरकार है.. लेकिन हकीकत इससे बिलकुल जुदा है... यूपीए सरकार ने अपने जिन मंत्रियों की तनख्वाह में से बीस फीसदी की कटौती का ऐलान किया था उसी में से एक हैं विदेश मंत्री एस एम कृष्णा जिन्होने पिछले तीन महीने से मौर्या शेरेटन के प्रेसिडेंसियल सूट में डेरा डाला हुआ था...ये वही प्रेसिडेंसियल सूट है जहां पर कभी अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और रूस के राष्ट्रपति पुतिन रह चुके हैं...इस सुइट के बेडरूम से लेकर बाथरूम तक आलीशान हैं। हर कोने से राजमहल की रौनक नजर आती है...जाहिर है कि कृष्णा इस शानदार सुइट को क्यों छोड़ना चाहेंगे। उन्होने तो 1 त्यागराज मार्ग का सरकारी, बंगला पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह वाला बंगला और तुगलक रोड वाले बंगले की पेशकश को ठुकरा दिया था। उनका मानना है कि ये बंगले उनके रहने लायक नहीं है..पर शायद उन्हे इस बात का अंदाजा नहीं है कि जिस जगह वो टिके हुए हैं उस जगह का एक दिन का भाड़ा एक लाख रुपये है..अगर पिछले तीन महीने का भाड़ा जोड़ा जाए तो ये 90 लाख रुपया बनता है.. अगर इस राशि को सूखाग्रस्त इलाके के किसानों के बीच बांट दिया जाता तो कम से कम एक सौ किसानों को राहत पहुंचाई जा सकती थी...

यूपीए सरकार के मंत्रियों की शानो शौकत यहीं ख़त्म नहीं होती इस फेरहिस्त में विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर का नाम भी है..जो ताज पैलेस के वीआईपी सुइट में ठहरे थे..इनसे भी केरल हाउस में ठहरने की गुजारिश की गई थी... लेकिन उन्होने इस गुजारिश को ठुकरा कर तीन महीने से प्रति दिन 40 हज़ार रुपये बतौर किराया देना ज्यादा मुनासिब समझा.. भला हो वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का जिन्होने सरकारी ख़जाना ख़त्म होता हुआ देख.. इन मंत्रियों को होटल छोड़ देने की मिन्नत करना शुरू कर दिया.. उनकी मिन्नते रंग लाई और आज आखिरकार इन मंत्रियों ने होटल छोड़ दिया...अब तो आप समझ ही सकते हैं कि जिस सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों का ये हाल है... वो सरकार देश के वित्तीय हालात को लेकर कितनी संजीदा हो सकती है

शुक्रवार, सितंबर 4

टीआरपी के लिए @#&*$ कुछ भी करेगा

बुधवार का दिन...सुबह के क़रीब 11 बज रहे थे..सभी न्यूज़ चैनलों पर लगातार ब्रेकिंग न्यूज़ आ रहा था.. आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी लापता...उनके हेलिकॉप्टर से संपर्क टूटा । शाम होते-होते ये ख़बर सबसे बड़ी ख़बर बन चुकी थी... लगभग सभी न्यूज़ चैनलों पर विशेषज्ञों ने मोर्चा थाम लिया था.. जितने चैनल उतने कयास... देश भर में असमंजस की स्थिति बनी हुई थी.. न्यूज़ चैनल्स भी इस मौके का ज़्यादा से ज़्यादा फायदा उठा लेना चाहते थे.. क्यों की बहुत दिनों से उनकी दुकान पर ऐसी मसालेदार कोई चीज नहीं आई थी... लगभग चैनलों में एक जैसे हालात थे.. शायद चैनल के वरिष्ठ लोग अपनी याददाश्त पर जोर डालकर अपने ऐसे किसी मित्र की तलाश कर रहे होंगे जो हैदराबाद में अपनी रोजी-रोटी चला रहा हो... बड़े चैनलों के तो अपने संपर्क सूत्र होते हैं.. लेकिन कुकरमुत्तों की तरह उग आए छोटे-छोटे न्यूज़ चैनलों के वरिष्ठों ने तो हैदराबाद में रह रहे अपने उन मित्रों को भी पत्रकार बना डाला जो वहां राशन की दुकान चला रहे थे...

खैर शाम तक ज़्यादा से ज़्यादा टीआरपी बटोरने का खेल चलता रहा... हर चैनल कुछ हटकर यानि एक्सकुलुसिव चलाने की फिराक में लगा हुआ था... लेकिन दोपहर से लेकर देर शाम तक घटनाक्रम में बहुत तब्दीली नहीं आई थी... ऐसे में दर्शक भी न्यूज़ चैनल से हटने लगे थे क्यों उन्हे भी हर पल कुछ नया और कुछ ताज़ा देखने की आदत है... इसकी भनक शायद टीआरपी रेटिंग में दूसरे स्थान पर काबिज एक बड़े न्यूज़ चैनल को लग चुकी थी... उसने फिर एक तुरूप का पत्ता खेला और रात साढ़े नौ बजे उसने ऐसा ब्रेकिंग देना शुरू किया जो किसी भी चैनल के पास नहीं था... इस न्यूज़ चैनल के एंकर ने दावे के साथ कहना शुरू किया की आंध्रप्रदेश के सीएम राजशेखर रेड्डी बिलकुल सुरक्षित हैं... स्थानीय आदिवासियों ने उन्हे देखा है.. इससे एक कदम आगे बढ़ते हुए उन्होने यहां तक दावा कर दिया कि मुख्यमंत्री साहब की वन विभाग के कर्मचारियों से बातचीत भी हुई है... और उन्होने कहा है कि वो पूरी तरह सुरक्षित हैं और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।

पहले तो लोगों को इस ख़बर पर विश्वास नहीं हुआ लेकिन लोगों को विश्वास दिलाने के लिए वो न्यूज़ चैनल अपने संपादक महोदय को भी लोगों के आगे कर दिया... संपादक महोदय ने भी दर्शकों की आंख में आंख डालकर दावे के साथ कहा कि रेड्डी साहब पूरी तरह सुरक्षित हैं... दर्शकों ने मजबूरन उनकी बातों पर विश्वास करना शुरू कर दिया... अब बारी कुछ दूसरे न्यूज चैनलों की थी.. उन्होने भी अपनी टीआरपी खिसकते देख उसे बड़े न्यूज चैनल का अनुसरण करना शुरू कर दिया... हालांकि इस दौड़ में कुछ न्यूज़ चैनल शामिल नहीं हुए और उन्होने अपनी जिम्मेदारी समझी... दूसरे दिन सुबह होते होते धटनाक्रम पर छाया धुंध साफ होने लगा... बचाव दल के लोगों को हेलिकॉप्टर का मलबा मिल गया था... और थोड़ी देर में उन्हे मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी समेत हेलिकॉप्टर में सवार सभी पांच लोगों के शव भी मिल गए.. इस ख़बर को भी उस तथाकथित बड़े चैनल ने जोर-शोर से चलाया और अपनी शाम वाली गलती को छिपाने के लिए कई ड्रामे भी किए... हो सकता है कि इस बार की टीआरपी रेटिंग में अपने उस आधे घंटे की टीआरपी की बदौलत वो सर्वोच्च स्थान भी हासिल कर ले... और शायद उसे इस बात का एहसास भी कभी ना हो कि उसने उस आधे घंटे में कितनी संवेदनाओं, कितने भावनाओं और पत्रकारिता के ना जाने कितने उसूलों का क़त्ल कर दिया है