सोमवार, अगस्त 10

स्वाइन फ्लू का ख़ौफ़

स्वाइन फ्लू जितनी तेजी से पूरे देश को अपने चंगुल में लेता जा रहा है उससे आने वाले दिनों में हालात के और भयावह होने की आशंका जताई जा रही है...इससे मरने वाले लोगों की संख्या पांच हो गई है...इससे सबसे ज़्यादा प्रभावित पुणे है..यहां पर लोगों ने डर कर अपने घरों से निकलना बंद कर दिया है..लेकिन पुणे में इस बीमारी की जांच करने के लिए केवल एक ही लैब है यानि प्रभावितों को जबतक स्वाइन फ्लू से ग्रसित होने का पता चलेगा तब तक काफी देर हो चुकी होगी...कुल मिलाकर कहें तो इस बीमारी से निपटने के हमारे पास पर्याप्त साधन नहीं है...अब अगर अमेरिका और यूरोपियन देशों से इस मामले में सफाई मांगी जाए तो मेरे ख्याल से ये ग़लत नहीं होगा..क्यों कि यही वो देश हैं जो भारत में प्लेग फैलने पर हायतौबा मचा रहे थे और हमारे देश को उन्होने अछूत का तमगा दे डाला था..लेकिन अब जबकि उन्ही देशों ने हमे इस स्वाइन फ्लू का दंश दिया है तो हम उनके ख़िलाफ़ बोलने तक की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं..शायद हमारे कमजोर इच्छा शक्ति वाले राजनीतिज्ञों को उनके सामने दुम हिलाने की आदत सी हो गई है तभी तो उनका हर जुल्म हंसते-हंसते शह लेते हैं..आखिर सहें भी क्यों नहीं ये वही राजनेता हैं जो अमेरिका की एक ही घुड़की पर करगिल की बाजी हाथ में आते हुए भी पाकिस्तानी सैनिकों को सुरक्षित वापस चले जाने देते हैं...ये वही राजनेता है जो मिश्र में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के साथ साझा बयान जारी कर अपने देश की इज्ज़त का सौदा कर देते हैं...अगर इन सबों को एक नज़र से देखा जाए तो स्वाइन फ्लू से ज़्यादा ख़तरनाक ये नेता ही नज़र आएंगे

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