सोमवार, अगस्त 17

शाहरूख प्रकरण का सच

शाहरूख ख़ान मामले पर क्यों इतनी हाय तौबा मचाई गई..ये मुझ समझ में नहीं आ रहा है.. आज मैं आपको इस पूरे प्रकरण की हकीकत से रूबरू करवाता हूं...जिस दिन पूरा देश स्वतंत्रता दिवस की 62वीं वर्षगांठ मना रहा था उस दिन पूरे मीडिया पर शाहरूख ख़ान छाए हुए थे...फ़िल्म जगत का ये सितारा एक ही पल में देश और इस्लाम का प्रतीक बन गया था...मीडिया ने तो इस पूरे मामले को देश के अपमान से जोड़ दिया था...आनन-फानन में बड़ी-बड़ी हस्तियों ने भी बयान देकर इस पूरे मामले को तूल दे दिया...जबकि वाक्या महज सुरक्षा जांच का था..जो कभी भी किसी के भी साथ हो सकता है...

शाहरूख ख़ान ने भी इस मामले को खूब तूल दिया और अपने हर बयान में ये बताया कि उन्हे केवल उनके सरनेम ख़ान के कारण पूरी फ़जीहत उठानी पड़ी...ये बयान देने के दौरान वो बार-बार "माइ नेम इज ख़ान" कहना नहीं भूल रहे थे.. जो कि उनकी आने वाली नई फ़िल्म का नाम है... यानि वो इस पूरे मामले को इसलिए भी तूल देना चाह रहे थे ताकि उनकी इस फ़िल्म की मुफ़्त में पब्लिसिटी हो जाए.. मीडिया ने ये अफवाह फैलाई कि शाहरूख ख़ान को न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर दो घंटे के लिए हिरासत में रखकर पूछताछ की गई...जबकि हकीकत इससे बिलकुल जुदा है... दरअसल एयरपोर्ट पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने शाहरूख के साथ उनका सामान नहीं होने के कारण शक के आधार पर दूसरे श्रेणी की सुरक्षा जांच के लिए रोका था... उस दौरान इस जांच के लिए और भी कई लोगों को रोका गया था जिसके कारण शाहरूख की बारी आने में थोड़ा समय लगा...उसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने शाहरूख से सामान्य पूछताछ की..इस पूरी प्रक्रिया में क़रीब 66 मिनट का समय लगा..जो कि बहुत ही सामान्य सी बात है... और बाद में जब सुरक्षाकर्मियों को शाहरूख के रुतबे का पता चला तो उन्होने उन्हे तुरत जाने दिया...

अब सवाल ये उठता है कि इस पूरे मामले में इतनी हायतौबा क्यों मचाई गई... दरअसल शाहरूख को अपनी जांच करवाना इसलिए भी नागवार गुजरा क्यों कि उन्हे भारत में कभी भी इस तरह की स्थिति से दो चार नहीं होना पड़ा था... भारत में ऐसे भी सुरक्षाकर्मियों को इतनी आजादी नहीं दी गई है कि वो सही तरीके से अपना काम कर सकें..उन्हे कदम-कदम पर सिफारिशी लोगों के साथ रियायत बरतनी पड़ती है.. यहां तक की एक छुटभैया नेता के फोन पर ही वो कांप जाते हैं.. और अगर अमेरिका की बात करें तो वहां पर कई लम्हे ऐसे भी आए जब पूर्व उपराष्ट्रपति अल गोर और कैनेडी जैसी हस्तियों को भी सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ा..जबकि उन्हे सुरक्षा जांच से छूट मिली हुई है..

अब रही बात मीडिया की....कि क्यों उसने इस पूरे मामले पर इतनी हायतौबा मचाई... दरअसल आजकल स्वाइन फ्लू के मामले में वो सनसनी नहीं रही जो उन्हे अच्छी टीआरपी दिला सके... तो बस शाहरूख का मामला आते ही उसे मौका मिल गया और पूरे दिन इस मामले को भुनाते रहे.. और लोगों की भावनाओं से खेलते रहे... कभी इस पूरे मामले को इस्लाम से जोड़ा गया तो कभी देशभक्ति से... कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है राई जैसे इस पूरे मामले को पहाड़ बना कर पेश किया गया... हो सकता है मेरी इस राय से कई लोग सहमत ना हों लेकिन सच तो आख़िर सच है

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