स्वाइन फ्लू ने पूरे देश को अपने आगोश में ले लिया है..इसका प्रकोप कहीं कम है तो कहीं ज़्यादा..फिर भी लोगों को उम्मीद है कि इस बार भी उनके किशन कन्हैया गोवर्धन पर्वत उठाकर उन्हे इस संकट से उबार लेंगे...अगर लोगों को ये उम्मीद नहीं होती तो शायद देश भर में दही-हांडी के मौके पर इतनी भीड़ नहीं उमड़ती...मुंबई और पुणे जैसे सबसे ज़्यादा प्रभावित इलाकों में भी हर तरफ दही-हांडी की धूम दिखी..इस धूम में फ़िल्मी सितारों ने भी जमकर अपनी भागीदारी दिखाई.. ये अलग बात है कि स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामले को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार इस आयोजन पर पाबंदी लगाने की फिराक में थी..अब सवाल ये उठता है कि क्या वाकई भगवान कृष्ण अपने भक्तों की रक्षा करेंगे या फिर जन्माष्टमी के मौके पर हुए इन आयोजनों से स्वाइन फ्लू के फैलने की रफ्तार और भी तेज हो जाएगी..खैर अगर मामला धर्म और आस्था से जुड़ा हुआ हो तो शासन और प्रशासन दोनों ही लाचार नज़र आते हैं..शायद ऐसा ही कुछ हुआ दही-हांडी के आयोजनों में भी...पूरे दिन गोविंदाओं की टोलियां कंधे से कंधा मिलाकर दही की हांडी फोड़ते रहे और शासन-प्रशासन मूक दर्शक की तरह देखता रहा...अगर इस आयोजन के बाद भी स्वाइन फ्लू का ज़्यादा फैलाव नहीं होता है तो मेरी आस्था भगवान में और बढ़ जाएगी...हो सकता है कि आप में से कई लोगों को मेरी ये दलील रास ना आए लेकिन आंख मूंदकर सामने से आ रहे खतरे को टाला तो नहीं जा सकता...ये तो बात थी भगवान के प्रति आस्था की..
अब रुख करते हैं आंध्रप्रदेश की जहां के मुख्यमंत्री डॉक्टर राजशेखर रेड्डी की आस्था झंडू बाम में है...क्यों कि आजकल वो स्वाइन फ्लू को ख़त्म करने के लिए झंडू बाम लगाने की वकालत कर रहे हैं...उनका नारा है "झंडू बाम लगाओ स्वाइन फ्लू दूर भगाओ"..अब ये तो शोध का विषय कि झंडू बाम में ऐसा क्या है जिससे स्वाइन फ्लू को काबू में किया जा सकता है..लेकिन ये बात तो तय है कि अगर आंध्रप्रदेश की जनता ने अपने मुख्यमंत्री की बात मानी तो इस मंदी के माहौल में भी झंडू बाम बनाने वाली कंपनी को जबरदस्त मुनाफा होगा...ये भी हो सकता है झंडू बाम वाले राजशेखर रेड्डी को अपना ब्रांड अंबेस्डर ही बना दें..
चलिए अब आपको मध्यप्रदेश ले कर चलते हैं जहां पर स्वाइन फ्लू की जांच के लिए संदिग्ध मरीजों के सैंपल को दिल्ली और पुणे भेजा जाता है..अब यहां सोचने वाली बात ये है कि स्वाइन फ्लू से प्रभावित दिल्ली और पुणे में पहले ही मरीजों की लंबी कतारें लगी हुई है तो ऐसे में उसे मध्यप्रदेश से आए सैंपल की जांच में तो वक्त लगेगा ही..और ऐसा ही हो भी रहा है..मध्यप्रदेश में सैंपल की जांच रिपोर्ट आने में कम से कम आठ से दस दिन लग रहे हैं...अब इस बात से आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं मध्यप्रदेश स्वाइन फ्लू से निपटने के लिए कितना तैयार है..और अगर वहां पर स्वाइन फ्लू नहीं फैल रहा है तो शायद ये भी महाकाल की कृपा ही है
शुक्रवार, अगस्त 14
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