बुधवार, अगस्त 12

चीन की दादागिरी

चीन एक बार फिर भारत को आंखे दिखाने लगा है...उसकी बुरी नीयत का खुलासा उसके थिंक टैंक के विचारों से हुआ है..इस थिंक टैंक के विचारों का चीनी सरकार पहले भी पालन करती रही है..अब इस थिंक टैंक ने भारत को 20-30 टुकड़ों में बांटने की राय दी है..उसका मानना है कि भारत को टुकड़ों में बांटकर ही एशिया में चीन का दबदबा बन सकता है। इसके लिए उसने पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे मित्र राष्ट्रों की सहायता लेने की भी राय दी है...चीन के नापाक मंसूबों के बारे में हम शुरू से ही जानते हैं..यहां हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि उसी के शह पर नेपाल में सत्ता पलट हुआ और वाम दल वहां की सत्ता पर काबिज हो गए..यानि चीन एक लंबे अर्से से पर्दे के पीछे से भारत को तोड़ने की कोशिश करता रहा है..अब सवाल ये उठता है कि चीन के इस रवैये का मुक़ाबला करने के लिए हम कितने तैयार हैं...

अगर सामरिक शक्ति की बात करें तो हम कई मामलों में चीन से काफी पीछे हैं और इस बात को खुद नेवी के चीफ ने भी माना है...फिर भी हमें सतर्क रहने की जरूरत है..लेकिन हमारा विदेश मंत्रालय अब भी चीन से बेहतर रिश्ते की दुहाई दे रहा है..उसका मानना है कि भारत को बांटने की राय चीन के एक निजी संस्था की है और चीन आधिकारिक तौर पर भारत से अच्छे रिश्ते चाहता है..इस मौके पर मैं विदेश मंत्रालय को 1962 का वाक्या याद दिलाना चाहूंगा जब पंडित नेहरू भी चीन को "पंचशील का सिद्धांत" की दुहाई देते रह गए और उसने भारत पर हमला कर दिया..हमारा देश आज एक बार फिर उसी मोड़ पर खड़ा है और हम फिर वही गलती दोहराने की भूल कर रहे हैं...हाल ही में भारत ने जिस तरह से पाकिस्तान के चतुर प्रधानमंत्री के सामने जिस तरह से घुटने टेके उससे तो यही जाहिर होता है कि हमारा विदेश मंत्रालय कूटनीतिक मामले में दिवालिया हो गया है...

अगर विदेश मामलों की बात करें तो कुछ दिन पहले इसी विदेश मंत्रालय ने ढ़िढ़ोरा पीटा था कि पाकिस्तान मुंबई हमले में मारे गए चार आतंकवादियों को अपना नागरिक मान रहा है और वो भारत से उनके शव लेना चाहता है...लेकिन विदेश मंत्रालय जिसे अपनी कूटनीतिक जीत बता रहा था उसकी हवा पाकिस्तान ने एक झटके में निकाल दी..वो इस बात से बिलकुल मुकर गया कि उसने मुंबई हमले में मारे गए आतंकवादियों को अपना नागरिक माना था...कहने को तो विदेश मंत्रालय में अंतर्राष्ट्रीय मामलों के जानकार शशि थरूर जैसे नेता बैठे हुए हैं लेकिन क्या उनकी जानकारियों और कूटनीतिक समझ का फायदा भारत को मिल रहा है?...आखिर में घूम फिरकर बात वहीं आ जाती है कि हम गलती पर गलती किए जा रहे हैं फिर भी उन ग़लतियों से सबक लेने की समझ हमारे अंदर नहीं आई..और जब तक ऐसा होता रहेगा हमारे पड़ोसी मुल्क ऐसे ही हमें आंख दिखाते रहेंगे...

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