एक बहुत प्रचलित कहावत है "घर की मुर्गी दाल बराबर" इस कहावत का मतलब भले ही कुछ और निकलता हो लेकिन आजकल ये कहावत शाब्दिक तौर पर सच साबित हो गया है...आजकल जिस तेजी से दाल की कीमत में बढ़ोत्तरी हो रही है उससे तो अब मुर्गी और दाल दोनों के भाव में कोई अंतर नहीं रह गया है..हां कहावत को थोड़ा व्यापक बनाया जा सकता है..कहावत में घर और बाहर दोनों ही जगह की मुर्गियों को शामिल किया जा सकता है...क्यों कि आजकल कहीं की भी मुर्गी की कीमत दाल से ज़्यादा नहीं है...कल इसी मामले में मैं अपने एक मित्र से बात कर रहा था..वो भी रोज बढ़ती इस महंगाई से परेशान थे..उनका तर्क था कि अब दाल की जगह घी का इस्तेमाल करना चाहिए...उन्होने अपने तर्क को साबित करने के लिए बताया कि एक किलो घी से पूरा महीना निकाला जा सकता है लेकिन उसके मुकाबले दाल ख़पत ज़्यादा होगी..उन्होने अपने खाने के मीनू में चावल, घी, नमक और रोटी,घी,नमक जैसे व्यंजन जोड़ लिए हैं। उनकी ये तरकीब मुझे भी पसंद आई...इसके आगे मैने सोचा कि अगर चावल घी नमक खाते-खाते बोर हो गया तो फ्लेवर बदलने के लिए एक कटोरी घी में एक चम्मच दाल या सब्जी मिलाई जा सकती है...
पिछले दिनों मैं मिठाई की दुकान पर गया...मैने बहुत ही ललचाई आंखों से समोसे की ओर देखा लेकिन उसके भाव में भी दो रुपए का उछाल आ गया था..अब तो ऐसा लग रहा था जैसे समोसा ही मुझे खाने वाली नज़रों से घूर रहा हो...मिठाई की दुकान से अपनी जीभ समेट कर आगे बढ़ा तो मुझे याद आया कि घर में सब्जी नहीं है...मैं सब्जी वाले के पास पहुंचा और सब्जियों के भाव पूछने लगा...सब्जियों के भाव सुनकर लगा कि अगर मैं एक महीने तक सब्जियां खाना बंद कर दूं तो मेरे एक महीने के पेट्रोल का खर्चा निकल आएगा...फिर भी मन मसोस कर कुछ मोलभाव कर कुछ निम्न श्रेणी की सब्जियां खरीद ली...पहले सब्जियों के साथ धनिया पत्ती फ्री में मिलती थी अब तो धनिया पत्ती खरीदने पर कुछ सब्जियां फ्री में मिल रही हैं... दूध का भाव जिस तरह से चढ़ रहा है उससे तो लगता है जैसे इसकी लत शराब की लत से भी ज़्यादा बुरी हो...बड़े-बुजुर्ग कहते हैं कि शराब की लत में लोग अपना घर-बार भी लुटा देते हैं...पर मुझे लगता है अब दूध पीने के लिए ही लोगों को अपना घर-बार लुटाना पड़ेगा.. उस पर से नेताओं का आश्वासन कि जल्दी ही महंगाई पर काबू पा लिया जाएगा..अरे इन नेताओं का क्या है ये लोग तो बोफोर्स तोप, चारा, कोयला और ना जाने क्या क्या खाकर अपना पेट भर लेते हैं..लेकिन हम आम लोगों को पेट भरने के लिए दाल-रोटी ही खानी पड़ती है..क्यों कि इससे ज़्यादा हमें हज़म भी तो नहीं होती
गुरुवार, अगस्त 13
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